इंडिया गेट पर कैंडल मार्च

हैमर कैंडलस्टिक पैटर्न इंट्राडे स्टेटर्जी 70% विनिंग रेट

हैमर कैंडलेस्टिक पेटर्न टॉप और बॉटम में बनता है। और इसका विनिंग रेट भी अच्छा है अगर आप हैमर कैंडलेस्टिक पेटर्न पर ट्रेड लेते हो। तो आपका स्टॉप लॉस भी काफी छोटा होता है। स्टॉप लॉस छोटा होने के कारण प्रॉफिट बड़ा हो जाता है। और हैमर कैंडलेस्टिक पेटर्न आपको वैसे तो हर जगह देखने को मिल जाएगा। लेकिन हमको हर जगह ट्रेड नहीं करना।

आपको सिर्फ उसी जगह काम करना है। जहा पर यह मार्केट रिवर्स होने का चांस ज्यादा रहता है। लाल कैंडल को समझना वह जगह हम सपोर्ट और रजिस्टेंस से पता करते हैं। आपको हैमर कैंडलेस्टिक पेटर्न को सपोर्ट रेजिस्टेंस पर ढूंढ़ना है।

उसके बाद हैमर कैंडलेस्टिक पेटर्न बनता है। तो उसके ब्रेकआउट पर ट्रेड ले सकते हैं। आइए जानते हैं हैमर कैंडलेस्टिक पेटर्न कैसा दिखता है।

हैमर कैंडलस्टिक पैटर्न कितने प्रकार के होते है।

  • हैमर कैंडल
  • इनवर्टेड हैमर

हैमर कैंडलेस्टिक पेटर्न दो प्रकार के होते हैं एक तो सिंपल हैमर कैंडल दूसरा इनवर्टेड हैमर कैंडल इसको आप बड़े आसान से चार्ट पर पहचान सकते हो। इसकी पहचान यह है कि हैमर कैंडल सीधा हथौड़े की जैसा दिखता है। इनवर्टेड हैमर कैंडल उल्टा हथौड़ी की तरह दिखता है।

हैमर कैंडल इनवर्टेड हैमर

दोस्तों आपको हैमर कैंडल और इनवर्टेड हैमर कैंडल में थोड़ा बहुत विग यानि कैंडल की परछाई कभी कभी कैंडल में देखने को मिल सकता है। तो हम उसको भी हैमर कैंडल और इनवर्टेड हैमर कैंडल ही मानेंगे। और कैंडल के ब्रेक आउट पर भी ट्रेड ले सकते हैं।

इसके ब्रेकआउट पर हमें ट्रेड लेना होता है। और यह पेटर्न टॉप पर बनता है तो आप ऐसी के ऊपर स्टॉप लॉस लगा सकते हो। बाइचांस एक या दो केंडल के बाद हमर पेटर्न बनता है तो आप हैमर के ऊपर वाले कैंडल पर स्टॉप लॉस लगा सकते है। और यह पैटर्न में कलर नहीं देखना होता है।

अगर रेजिस्टेंस पर हरे या लाल कलर का हैमर या इनवर्टेड हैमर कैंडलेस्टिक पेटर्न देखने को मिलता है। तो हमें बेरिश ट्रेड लेना है। और वैसे ही सपोर्ट पर अगर हरा या लाल हैमर या इनवर्टेड हैमर देखने को मिलता है। तो हमें बुलिश ट्रेड लेना है यह बातों का ध्यान रखें।

यह पॉइंट का फॉलो करे।

  • टाइम फ्रेम 1 घंटा और 5 मिनट यूज करे।
  • 1 घंटे टाइम फ्रेम में आपको सपोर्ट रेजिस्टेंस ड्रॉ करना है।
  • 5 मिनट के चार्ट पर हैमर कैंडल और इनवर्टेड हैमर कैंडलस्टिक पेटर्न ढूंढना है।
  • हैमर कैंडल और इनवर्टेड हैमर कैंडलस्टिक पेटर्न के ब्रेकआउट पर ही ट्रेड लेना है।
  • हमारा टारगेट नेक्स्ट सपोर्ट या रेजिस्टेंस होगा।
  • हैमर कैंडल और इनवर्टेड हैमर कैंडलस्टिक पेटर्न के ऊपर या निचे स्टॉप लॉस लगाना है। अगर हैमर कैंडल और इनवर्टेड हैमर के पीछे एक या दो कैंडल बना हुआ है तो हैमर कैंडल या इनवर्टेड हैमर के पीछे वाले केंडल के ऊपर या निचे स्टॉप लॉस लगाना है।

सपोर्ट और रजिस्टेंस कैसे ड्रॉ करें।

जिस भी स्टॉक किया इंडेक्स में आप ट्रेड करना चाहते हैं। उसको पहले 1 घंटे के टाइम पर में बदलें। उसके बाद जैसे की आज ट्रेड करना है। तो मैं कल और परसों का हाई और लो को जॉन बना के ड्रॉ कर लूंगा। यही हमारा सपोर्ट और रजिस्टेंस कुछ इस प्रकार दिखेगा ।

एक घंटा टाइम फ्रेम बैंक निफ़्टी चार्ट

सपोर्ट और रेजिस्टेंस ड्रॉ करने के बाद 5 मिनट के टाइम फ्रेम में चार्ट को कन्वर्ट कर लेना है। 5 मिनट के टाइम फ्रेम में सपोर्ट और रजिस्टेंस कुछ इस प्रकार दिखेगा।

एक घंटा टाइम फ्रेम बैंक निफ़्टी चार्ट सपोर्ट और रजिस्टेंस

हैमर कैंडलस्टिक पैटर्न इंट्राडे स्टेटर्जी

अब ट्रेड लेना है। जब आप को दिखे की सपोर्ट या रजिस्टेंस पर हैमर कैंडल या इनवर्टर हैमर कैंडल बनता है। तो उसके ब्रेकआउट पर ट्रेड लेना है। रूल के हिसाब से स्टॉपलॉस लगाना है। नीचे कुछ फोटो में समझाया गया है। थोड़ा ध्यान से देखो।

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हैमर कैंडलस्टिक पैटर्न इंट्राडे स्टेटर्जी

मेरी सलाह

दोस्तों यह बात आपको ध्यान रखना है कि इंट्राडे ट्रेडिंग में आपको 90% काम नहीं करना पड़ता है। सिर्फ इंतजार करना पड़ता है और यह इंतजार किस चीज का करना है। कि सेटअप जो भी है आपका उसको चार्ट पर बनने में 90% हमें इंतजार करना पड़ता है।

बस और चार्ट पर हमारा सेटअप बनने के बाद हमें 10 परसेंट ही काम करना पड़ता है। और यह चीज आपको ध्यान रखनी है। ताकि आप यह सेटअप बनने से पहले ट्रेड ना लो। और अपना ट्रेड लेने के बाद अपने टारगेट और स्टॉप लॉस पर ही पोजीशन को एग्जिट करो। और अपने मनी मैनेजमेंट को फॉलो जरूर करना जो भी आपने बनाया है।

ताकि आपका बड़ा लोस ना हो और आप लंबे समय तक मार्केट में बने रहो। और ट्रेड लेने से पहले आपको कम से कम 3 महीने की बैक टेस्टिंग करनी है बैक टेस्टिंग करने के बाद ही ट्रेड ले। क्योंकि आपने अभी सिर्फ यही स्ट्रेटजी को समझा है। सीखा नहीं है आपको सीखने के लिए चार्ट में अपनी आंखों को ट्रैन करना होगा।

और इसके लिए आपको कम से कम तीन चार महीने की बैक टेस्टिंग करनी होगी। जिससे कि आपके आंखें ट्रेन होगा। और आपको एक कॉन्फिडेंस आएगा ट्रेड लेते समय। यह आर्टिकल आपको कैसा लगा। हमें कमेंट करके जरूर बताएं और अगर आपकी कोई राय है। तो हमें वह भी बता सकते हैं ऐसे ही स्टेट्रजी के लिए और आर्टिकल पढ़ सकते हैं।

How to study candles and candlestick chart patterns? शेयर बाज़ार में चार्ट पैटर्न को कैसे समझे ?

शेयर बाज़ार में किसी शेयर या शेयर बाज़ार के स्वभाव को समझने के लिए चार्ट पैटर्न का अध्यन किया जाता है जिनमे कई सारे चार्ट पैटर्न शामिल है, लेकिन candlestick चार्ट पैटर्न मुख्य रूप से उपयोग किया जाता है| Candlestick चार्ट पैटर्न की खोज जापान में हुई थी, और किसी स्टॉक के स्वाभाव को समझने के लिए दुसरे चार्ट patterns के मुकाबले में कैंडलस्टिक चार्ट पैटर्न को सबसे सरल तथा बेहतरीन मना जाता है, और एसा है भी क्यूंकि हम खुद भी कैंडलस्टिक चार्ट पैटर्न की मदद से ट्रेडिंग करते है तथा इससे नुक्सान होने की सम्भावना बहोत कम हो जाती है, और यदि बाकि रूल्स भी follow किये जाये तो ज्यादा उम्मीद है की आपको profit ही होगा |

Candlestick चार्ट पैटर्न में एक या अधिक candle के मिलाप से ली गयी जानकारी के आधार पर भाव के सिग्नल प्राप्त किये जाते है जिनके आधार पर ट्रेडिंग की जाती है | candlestick चार्ट पैटर्न शेयर बाज़ार में होने वाले उतार चढाव को अच्छे प्रकार तथा सरल रूप में पेश करता है, तथा इसके द्वारा प्रदर्शित परिणाम अन्य किसी चार्ट से कही बेहतर होते है, और भाव में आने वाली तेजी और मंदी को भी इस पैटर्न की सहायता से आसानी से समझा जा सकता है और दो या दो से अधिक कैंडल्स का उपयोग करके हम भाव में गिरावट तथा तेजी का अंदाजा लगा सकते है| लेकिन पैटर्न को समझने के लिए सबसे पहले आपको candle के बारे में जानकारी होना आवश्यक है, जो की आसानी से समझा जा सकता है |

किसी भी candle के तीन भाग तक होते है, जिनमे candle की body, upper shadow, तथा lower shadow होती है और लाल रंग की candle bearish तथा हरे रंग की candle bullish सिग्नल के लिए होती है जैसा की निचे दिखाया गया है

प्रतियेक candle में body candle के मुख्य पार्ट को कहते है तथा दोनों तरफ की टेल जैसी संरचना को shadow कहते है जिसमे ऊपर की और एक सिरे पर भाव सबसे अधिक तथा निचे सबसे कम होता है |

कई बार हमें सुनने को मिलता है की बहुत से लोग पूछते है की कैंडल्स कितने प्रकार या तरह की होती है ? चलिए हम आपको बताते है, की candle कितने प्रकार की होती है

Long day candle ( लॉन्ग डे candle ) : यह candle पिछले दिन के बंद होने वाले भाव की तुलना में अधिक फर्क होता है तथा यह candle रचना में काफी लम्बी होती है |

Short day candle ( शोर्ट डे candle ) : यह कैंडल के लाल कैंडल को समझना पिछले दिन बंद होने वाले भाव की candle की अपेक्षा ज्यादा बड़ी नहीं होती अर्थात बहुत कम फर्क होता है जिसमे बहुत छोटे candle बनते है, दोनों का उदाहरण आपको निचे लाल कैंडल को समझना दिखाया गया है |

Doji candle ( डोजी कैंडल ) : यह candle तब बनती है जब खुलने वाले भाव या band होने वाले भाव के बिच न के बराबर फर्क होता है या दोनों भाव सामान होते है | डोजी candle को हम neutral candle भी कहते है, क्यूंकि यहाँ भाव ऊपर या निचे जा सकता है, लेकिन यदि शेयर्स का volume बिलकुल कम हो गया हो तो डोजी एक मजबूत सिग्नल दे सकती है |

  • ग्रेव्ह स्टोन डोजी
  • ड्रैगन फलाय
  • लॉन्ग डे डोजी
  • मोर्निंग स्टार
  • इवनिंग स्टार
  • शूटिंग स्टार डोजी |

Hammer and hanging ma n लाल कैंडल को समझना candle ( हैमर तथा हैंगिंग मेंन candle ): Hammer एक छोटी candle होती है जिसकी lower shadow लम्बी होती है और यह candle देखने में कुछ कुछ हथोड़े की तरह लगती है, इसीलिए इसे हैमर candle कहते है, इसमें रंग का कौई महत्त्व नहीं होता लेकिन इसकी दिशा मायने रखती है, और अगर यह दिशा तेजी की और हुई तो इसे बहुत अच्छा सिग्नल माना जाता है |

यह candle अंग्रेजी अक्षर के T जैसी दिखाई पड़ती है, इसे रिकवरी candle भी कहते है क्युकी इस candle के बाद अधिकांश, ट्रेंड correct होकर चलता है |

यह candle ट्रेंड रेवेर्सल को दर्शाती है, जो स्थापित मंदी का अंत तथा तेजी की शुरुआत के बारे में बताती है, इस पैटर्न में पहले एक लम्बी मंदी की candle बनती है तथा दूसरी candle तेजी की बनती है जिसके बाद तेजी आने के अत्यधिक सम्भावनाये होती है |

यह भी एक ट्रेंड रेवेर्सल पैटर्न है लेकिन यह तेजी के बाद मंदी की शुरुआत को दर्शाता है, इसमें पहली candle तेजी की बनती है जी लम्बी होती है तथा दूसरी candle मंदी की बनती है जो पहली candle से थोडा ऊपर close होती है, जब चार्ट पैटर्न में एसी स्तिथि दिखाई दे तो हमें बेचने के लिए तैयार हो जाना चाहिए, क्यूंकि इसके बाद मंदी का ट्रेंड शुरू हो जाता है |

जब यह candle बनती है तो यह मंदी का अंत तथा तेजी की सुरुआत को दर्शाती है, इसमें पहले एक डोजी बनती है जिसका बोडी छोटी होती है तथा इसके बाद एक बड़ी और तेजी वाली candle बनती है, जो पहली candle को पूरी तरह ढक लेती है, और इसके बाद तेजी का ट्रेंड शुरू हो जाता है |

यह candle bullish anglefing candle pattern की बिलकुल विपरीत होती है इसमें पहले छोटी तेजी वाली डोजी बनती है तथा फिर मंदी वाली बड़ी candle बनती है, जिसके बाद lower ट्रेंड शुरू हो जाता है |

दलित छात्रा की हत्या के खिलाफ सुदर्शन समाज का कैंडल मार्च

भारतीय सुदर्शन समाज महासंघ झारखंड प्रदेश ने गुरुवार को कैंडल मार्च निकाल कर बीआईटी मेसरा की छात्रा पल्‍लवी के हत्यारे पीयूष को कड़ी सजा देने की मांग.

दलित छात्रा की हत्या के खिलाफ सुदर्शन समाज का कैंडल मार्च

धनबाद, कार्यालय संवाददाता

भारतीय सुदर्शन समाज महासंघ झारखंड प्रदेश ने गुरुवार को कैंडल मार्च निकाल कर बीआईटी मेसरा की छात्रा पल्‍लवी के हत्यारे पीयूष को कड़ी सजा देने की मांग की। गुरुवार की शाम को काफी संख्या में लोग कैंडल लेकर सड़क पर निकले। महिलाएं हाथों में कैंडल लेकर और जस्टिस फॉर पल्लवी के नारे लगाते हुए मार्च की अगुवाई कर रही थीं। कैंडल मार्च में शामिल फूल जोशी ने बताया कि घटना को लेकर सुदर्शन समाज के लोगों में काफी गुस्‍सा है। लोग कैंडल मार्च निकालकर हत्‍यारोपित पीयूष को फांसी की सजा दिए जाने की मांग कर रहे हैं।

सौ कैंडल पॉवर का बल्ब

सआदत हसन मंटो

"इस कहानी में इंसान की स्वाभाविक और भावनात्मक पहलूओं को गिरफ़्त में लिया गया है जिनके तहत वो कर्म करते हैं। कहानी की केन्द्रीय पात्र एक वेश्या है जिसे इस बात से कोई सरोकार नहीं कि वो किस के साथ रात गुज़ारने जा रही है और उसे कितना मुआवज़ा मिलेगा बल्कि वो दलाल के इशारे पर कर्म करने और किसी तरह काम ख़त्म करने के बाद अपनी नींद पूरी करना चाहती है। आख़िर-कार तंग आकर अंजाम की परवाह किए बिना वो दलाल का ख़ून कर देती है और गहरी नींद सो जाती है।"

वो चौक में क़ैसर पार्क के बाहर जहां टांगे खड़े रहते हैं। बिजली के एक खंबे के साथ ख़ामोश खड़ा था और दिल ही दिल में सोच रहा था। कोई वीरानी सी वीरानी है!

यही पार्क जो सिर्फ़ दो बरस पहले इतनी पुररौनक़ जगह थी, अब उजड़ी पचड़ी दिखाई थी। जहां पहले औरत और मर्द शोख़-ओ-शंग फ़ैशन के लिबासों में चलते फिरते थे। वहां अब बेहद मैले कुचैले कपड़ों में लोग इधर-उधर बे मक़सद फिर रहे थे। बाज़ार में काफ़ी भीड़ थी मगर उसमें वो रंग नहीं था जो एक मेंले–ठेले का हुआ करता था। आस पास की सीमेंट से बनी हुई बिल्डिंगें अपना रूप खो चुकी थीं। सर झाड़ मुँह फाड़ एक दूसरे की तरफ़ फटी फटी आँखों से देख रही थीं, जैसे बेवा औरतें।

वो हैरान था कि वो ग़ाज़ा कहाँ गया, वो सिंदूर कहाँ उड़ गया। वो सर कहाँ ग़ायब हो गए जो उसने कभी यहां देखे और सुने थे। ज़्यादा अर्से की बात नहीं, अभी वो कल ही तो (दो बरस भी कोई अर्सा होता है) यहां आया था। कलकत्ते से जब उसे यहां की एक फ़र्म ने अच्छी तनख़्वाह पर बुलाया था तो उसने क़ैसर पार्क में कितनी कोशिश की कि उसे किराए पर एक कमरा ही मिल जाये मगर वो नाकाम रहा था। हज़ार फ़रमाइशों के बावजूद।

मगर अब उसने देखा कि जिस कंजड़े, जोलाहे और मोची की तबीअत चाहती थी, फ़्लैटों और कमरों पर अपना क़ब्ज़ा जमा रहा था।

जहां किसी शानदार फ़िल्म कंपनी का दफ़्तर हुआ करता था, वहां चूल्हे सुलग रहे हैं। जहां कभी शहर की बड़ी बड़ी रंगीन हस्तियां जमा होती थीं, वहां धोबी मैले कपड़े धो रहे हैं।

दो बरस में इतना बड़ा इन्क़िलाब!

वो हैरान था, लेकिन उसको इस इन्क़िलाब का पसमंज़र मालूम था। अख़बारों के ज़रिये से और उन दोस्तों से जो शहर में मौजूद थे। उसे सब पता लग चुका था कि यहां कैसा तूफ़ान आया था। मगर वो सोचता था कि ये कोई अजीब-ओ-ग़रीब तूफ़ान था जो इमारतों का रंग-ओ-रूप भी चूस कर ले गया। इंसानों ने इंसान क़त्ल किए। औरतों की बेइज़्ज़ती की, लेकिन इमारतों की ख़ुश्क लकड़ियों और उनकी ईंटों से भी यही सुलूक किया।

उसने सुना था कि उस तूफ़ान में औरतों को नंगा किया गया था, उनकी छातियां काटी गई थीं। यहां उसके आस पास जो कुछ था, सब नंगा और जोबन बुरीदा था।

वो बिजली के खंबे के साथ लगा अपने एक दोस्त का इंतिज़ार कर रहा था जिसकी मदद से वो अपनी रिहाइश का कोई बंदोबस्त करना चाहता था। उस दोस्त ने उससे कहा कि तुम क़ैसर पार्क के पास जहां तांगे खड़े रहा करते हैं मेरा इंतिज़ार करना।

दो बरस हुए जब वो मुलाज़मत के सिलसिले में यहां आया तो ये टांगों का अड्डा बहुत मशहूर जगह थी, सबसे उम्दा, सबसे बाँके टांगे सिर्फ़ यहीं खड़े रहते थे क्योंकि यहां से अय्याशी का हर सामान मुहय्या हो जाता था। अच्छे से अच्छा रेस्टोरेंट और होटल क़रीब था। बेहतरीन चाय, बेहतरीन खाना और दूसरे लवाज़मात भी।

शहर के जितने बड़े दलाल थे वो यहीं दस्तयाब होते थे। इसलिए कि क़ैसर पार्क में बड़ी बड़ी कंपनियों के बाइस रुपया और शराब पानी की तरह बहते थे।

उसको याद आया कि दो बरस पहले उसने अपने दोस्त के साथ बड़े ऐश किए थे। अच्छी से अच्छी लड़की हर रात को उनकी आग़ोश में होती थी। स्काच जंग के बाइस नायाब थी मगर एक मिनट में दर्जनों बोतलें मुहय्या हो जाती थीं।

टांगे अब भी खड़े थे मगर उन पर वो कलग़ियाँ, वो फुंदने, वो पीतल के पालिश किए हुए साज़-ओ-सामान की चमक-दमक नहीं थी। ये भी शायद दूसरी चीज़ों के साथ उड़ गई थी।

उसने घड़ी में वक़्त देखा, पाँच बज चुके थे। फ़रवरी के दिन थे। शाम के साए छाने शुरू हो गए थे। उसने दिल ही दिल में अपने दोस्त को लअनत-मलामत की और दाएं हाथ के वीरान होटल में मोरी के पानी से बनाई हुई चाय पीने के लिए जाने ही वाला था कि किसी ने उसको हौले से पुकारा। उसने ख़याल किया कि शायद उसका दोस्त आ गया। मगर जब उसने मुड़ कर देखा तो एक अजनबी था। आम शक्ल-ओ-सूरत का, लट्ठे की नई शलवार में जिसमें अब और ज़्यादा शिकनों की गुंजाइश नहीं थी। नीली पाप्लीन की क़मीज़ जो लांड्री में जाने के लिए बेताब थी।

उसने पूछा, “क्यूँ भई। तुमने मुझे बुलाया?”

उसने हौले से जवाब दिया, “जी हाँ।”

उसने ख़्याल किया, मुहाजिर है, भीक मांगना चाहता है, “क्या मांगते हो?”

उसने उसी लहजे में जवाब दिया, “जी कुछ नहीं।” फिर क़रीब आ कर कहा, “कुछ चाहिए आपको?”

“कोई लड़की-वड़की।” ये कह कर वो पीछे हट गया।

उसके सीने में एक तीर सा लगा कि देखो इस ज़माने लाल कैंडल को समझना में भी ये लोगों के जिन्सी जज़्बात टटोलता फिरता है और फिर इंसानियत के मुतअल्लिक़ ऊपर-तले उसके दिमाग़ में बड़े हौसला शिकन ख़्यालात आए। उन्ही ख़्यालात के ज़ेर-ए-असर उसने पूछा, “कहाँ है?”

उसका लहजा दलाल के लिए उम्मीद अफ़्ज़ा नहीं था। चुनांचे क़दम उठाते हुए उसने कहा, “जी नहीं, आपको ज़रूरत नहीं मालूम होती।”

उसने उसको रोका, “ये तुम ने किस तरह जाना। इंसान को हर वक़्त उस चीज़ की ज़रूरत होती है जो तुम मुहय्या कर सकते हो. वो सूली पर भी. जलती चिता में भी।”

वो फ़लसफ़ी बनने ही वाला था कि रुक गया, “देखो. अगर कहीं पास ही है तो मैं चलने के लिए तैयार हूँ। मैंने यहाँ एक दोस्त को वक़्त दे रखा है।”

प्रद्युम्न मर्डर केसः इंडिया गेट पर कैंडल मार्च

'सिर्फ रायन इंटरनैशनल स्कूल के 7 साल के बच्चे की नहीं, यह उन सभी बच्चों के लिए आवाज है जो स्कूलों की लापरवाही और बदमाशी की वजह से आज इस दुनिया में नहीं हैं और उनका परिवार अपनी जिंदगी को खींच रहा है। हमने उनका साथ नहीं दिया तो बच्चों को खोना तो रोज की कहानी हो जाएगी।' यह कहना था शिप्रा सैनी का, जो अपने दो बच्चों के साथ हाल-फिलहाल में खोए गए बच्चों की याद में कैंडल मार्च के लिए इंडिया गेट पहुंची थीं।

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इंडिया गेट पर कैंडल मार्च

इसी साल जनवरी में डीपीएस ग्रेटर नोएडा में गजल यादव की अचानक मौत हुई थी। उनके पिता लाल चंद यादव भी इस मार्च में पहुंचे। उन्होंने बताया कि उसकी मौत के बारे में बताया कि उसकी नाक से खून आ रहा था। टीचर ने फोन करने की कोशिश की तो मैनेजमेंट ने रोक दिया। जो बताया गया, वह रहस्यमय है इसलिए मैं बस सीबीआई जांच चाहता हूं। मैं नहीं चाहता कि किसी भी माता-पिता को यह दिन देखना पड़े इसलिए सबके बच्चों के लिए यहां आया हूं।

गाजियाबाद पैरंट्स असोसिएशन से सत्यपाल चौधरी ने कहा कि इन सभी प्राइवेट स्कूलों लाल कैंडल को समझना को सरकार टेकओवर करे। नए एजुकेशन रिफॉर्म होने जरूरी हैं, क्योंकि सभी प्राइवेट स्कूल या तो पूंजीपतियों के हैं या फिर नेताओं के हैं और इसी वजह से कोई भी घटना में पुलिस इन पर ऐक्शन नहीं लेती। सभी बच्चों के मामलों में सीबीआई जांच होनी चाहिए। वैशाली से आईं एक बच्चे की मां दीपा सिंह कहती हैं, हम स्कूलों को फीस दे रहे हैं और यही चाहते हैं कि 6-7 के इस वक्त में स्कूल बच्चों की सेफ्टी का जिम्मा लें। दिक्कत यह है कि स्कूल बच्चों को बला समझते हैं, उनका सोचना यही है कि हमें उनसे कमाना है, बाकी हमारी जिम्मेदारी कोई नहीं है। हम इसी लापरवाही के खिलाफ आवाज उठाने आए हैं कि सरकार जागे और कोई तो ऐक्शन ले।

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